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पूर्व मंत्री पुलक राय का नाम लेते हुए ऋतब्रत ने राज्य सरकार से उनके कार्यकाल से जुड़े मामलों की जांच कराने की मांग की
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने मंगलवार को विधानसभा पहुंचकर अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी से निकाले जाने के बावजूद उनके मन में ममता बनर्जी के प्रति सम्मान पहले जैसा ही बना रहेगा।
विधानसभा पहुंचने से पहले भाजपा विधायक तापस राय ने एक्स पर दावा किया था कि ऋतब्रत लगभग 50 तृणमूल विधायकों के साथ विधानसभा पहुंच रहे हैं और पार्टी भीतर से टूट चुकी है। हालांकि विधानसभा परिसर में प्रवेश करते समय ऋतब्रत ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह केवल अटकलें हैं।
उन्होंने कहा कि मैं विधानसभा अपने काम से आया हूं। 50 विधायक मेरे साथ हैं या नहीं, इसकी जिम्मेदारी मैं नहीं ले सकता। मैं सिर्फ अपनी और एंटाली के विधायक संदीपन साहा की जिम्मेदारी ले सकता हूं।
सोमवार को तृणमूल कांग्रेस ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। दोनों विधायकों ने आरोप लगाया था कि छह मई को विपक्ष के नेता के चयन को लेकर कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था और उपस्थिति रजिस्टर में किए गए हस्ताक्षरों का दुरुपयोग कर उसे प्रस्ताव का रूप दे दिया गया।
इस विवाद के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा था कि दोनों विधायकों की लिखित शिकायत के आधार पर विधानसभा सचिवालय ने हेयर स्ट्रीट थाने में मामला दर्ज कराया है। उन्होंने यह भी बताया कि मामले की जांच के लिए सीआईडी को निर्देश दिया गया है।ेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेे
विधानसभा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ऋतब्रत ने कहा कि ममता सभी की नेता हैं। पार्टी से मुझे निकाला जा सकता है, लेकिन उनके प्रति मेरा सम्मान बना रहेगा।ममता बनर्जी ही मेरी नेता हैं।
उन्होंने तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि ममता बनर्जी द्वारा स्थापित पार्टी अब अपनी मूल पहचान खो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी कॉरपोरेट शैली में संचालित होने लगी है।
ऋतब्रत ने उलबेड़िया क्षेत्र में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव से पहले ही उन्होंने स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और संगठनात्मक समस्याओं को लेकर पार्टी नेतृत्व तथा रणनीतिक सलाहकारों को आगाह किया था, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने उलबेड़िया नगरपालिका के अध्यक्ष अभय दास और अन्य स्थानीय नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
पूर्व मंत्री पुलक राय का नाम लेते हुए ऋतब्रत ने राज्य सरकार से उनके कार्यकाल से जुड़े मामलों की जांच कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सरकारी उपक्रमों और प्रभावशाली व्यक्तियों के बीच संदिग्ध संबंधों की जांच होनी चाहिए।
ऋतब्रत के इन बयानों के बाद राज्य की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष और हालिया निष्कासन को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि पार्टी की ओर से उनके आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।